चलमडी भरल्या कविता - Chalamdi Bharlya Poem

Chalamdi Bharlya Poem, इसमें चलमडी भरल्या शीर्षक से रोजमर्रा के सार्वजनिक घरेलू जीवन से प्रेरित एक हास्यपूर्ण राजस्थानी कविता के बारे में जानकारी है।

Chalamdi Bharlya Poem

चलमडी भरल्या कविता के बोल - Lyrics of Chalamdi Bharlya Poem


ओ, चिमन्या रे बिमन्या रे
ओ, लोटण पोटण
चलमडी भरल्या

कतत कात कत
कतत कात कत
कतत कात कत कत

ओ, चिमन्या रे बिमन्या रे
ओ, लोटण पोटण
चलमडी भरल्या

चिमन्यों बोल्यो बिमन्यों ल्यासी, बिमन्यों बोल्यो चिमन्यों
अतरा में अठे पपल्यो आगो, साथ में बीक सुमन्यों

ओ भाया पपल्या रे
ओ भाया सुमन्या रे
चलमडी भरल्या

कतत कात कत
कतत कात कत
कतत कात कत कत

ओ, चिमन्या रे बिमन्या रे
ओ, लोटण पोटण
चलमडी भरल्या


टुळकतो टुळकतो ग्यारस्यो आगो, आगो काळयो, झूंड्यो
आँक साथ बाकी ठलुआ, नंद्यों, माल्यो, डूंड्यो

ओ भाया झूंड्या रे
ओ भाया डूंड्या रे
चलमडी भरल्या

कतत कात कत
कतत कात कत
कतत कात कत कत

ओ, चिमन्या रे बिमन्या रे
ओ, लोटण पोटण
चलमडी भरल्या

सारा मिलर नाचबा लागगा, कर दी उछळ कूद
कूदम कादी में खाट टूटगी, साथ में ढुळगो दूध

ओ भाया नाचबाळा
ओ भाया कूदबाळा
चलमडी भरल्या

कतत कात कत
कतत कात कत
कतत कात कत कत

ओ, चिमन्या रे बिमन्या रे
ओ, लोटण पोटण
चलमडी भरल्या

खुद ही ऊठ, चिलम काणी गयो, पग में फँसगा कपड़ा
सीधो जार चिलम पर पड्यो, चिलम का होगा टुकड़ा

अरे, चलमडी टूटगी रे
चलमडी फूटगी रे
रे कईयाँ पीऊँ

कतत कात कत
कतत कात कत
कतत कात कत कत

ओ, चिमन्या रे बिमन्या रे
ओ, लोटण पोटण
चलमडी भरल्या

चलमडी भरल्या कविता का वीडियो - Video of Chalamdi Bharlya Poem



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डिस्क्लेमर (Disclaimer)

इस कविता की समस्त रचनात्मक सामग्री रमेश शर्मा की मौलिक रचना है। कविता में व्यक्त विचार, भावनाएँ और दृष्टिकोण लेखक के स्वयं के हैं। इस रचना की किसी भी प्रकार की नकल, पुनर्प्रकाशन या व्यावसायिक उपयोग लेखक की लिखित अनुमति के बिना वर्जित है।
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