मैं नादान था कविता - Main Naadaan Tha Poem

Main Naadaan Tha Poem, इसमें मैं नादान था नामक शीर्षक से एक कविता है जिसमें एक लड़के को अपने रिश्तों को लेकर मन में उठी हुई कशमकश को बताया गया है।

Main Naadaan Tha Poem

मैं नादान था कविता के बोल - Lyrics of Main Naadaan Tha Poem


मैं नादान था जो इस भुलावे में रहा
कि परिवार एक मंदिर की तरह होता है
जिसमें कई देवी-देवताओं का वास होता है
आखिर मैं इस सच्चाई को क्यों नहीं समझ पाया
कि परिवार की वजह से ही राम को बनवास होता है।

मैं नादान था जो इस भुलावे में रहा
कि मेरे दिल को कोई पढ़ लेगा
जान लेगा कि मुझमें कोई सनक नहीं है
बस एक ही कमी रह गई मुझ में
कि मेरे पास सिक्कों की खनक नहीं है।


मैं नादान था जो इस भुलावे में रहा
कि दुनिया में कोई है जो मुझे जानता है
सुख में और दुख में मुझे अपना मानता है
मेरी आँखों से ही जान लेता है मेरे दिल का हाल
और मेरी हँसी को मुझसे ज्यादा पहचानता है।

नादानी से निकल कर अब मैं ये जान चुका हूँ
दुनियादारी को हद से ज्यादा पहचान चुका हूँ
अपनो से ठोकरें खा कर इस बात को मान चुका हूँ
आज के युग में पैसा ही काबिलियत का सबूत है
मैं अब अपनी काबिलियत साबित करने की ठान चुका हूँ।

मैं नादान था कविता का वीडियो - Video of Main Naadaan Tha Poem



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डिस्क्लेमर (Disclaimer)

इस कविता की समस्त रचनात्मक सामग्री रमेश शर्मा की मौलिक रचना है। कविता में व्यक्त विचार, भावनाएँ और दृष्टिकोण लेखक के स्वयं के हैं। इस रचना की किसी भी प्रकार की नकल, पुनर्प्रकाशन या व्यावसायिक उपयोग लेखक की लिखित अनुमति के बिना वर्जित है।
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