कोई बात होती कविता - Koi Baat Hoti Poem

Koi Baat Hoti Poem, इसमें कोई बात होती नामक शीर्षक से एक कविता है जिसमें एक लड़के और लड़की की भावनाओं को उसके अपने नजरिए से बताने की कोशिश की गई है।

Koi Baat Hoti Poem

कोई बात होती कविता के बोल - Lyrics of Koi Baat Hoti Poem


मेरी कमियाँ बताने वाले, मेरी खूबियाँ भी बताते तो कोई बात होती
गैरों को बताना ठीक नहीं था, मुझको बताते तो कोई बात होती

अपना दर्द सुनाने वाले, मेरा भी सुनाते तो कोई बात होती
सिक्के का एक पहलू ही दिखाया, दूसरा भी दिखाते तो कोई बात होती

घर की बातें दुनिया में बताना गलत है, इस बात को निभाते तो कोई बात होती
दूसरों पर मनमाना इल्जाम लगाकर, इतना ना गिराते तो कोई बात होती

अपने माँ-बाप जैसी चिंता, सभी बड़ों के लिए जताते तो कोई बात होती
दूसरे बुजुर्ग भी माँ बाप जैसे हो सकते हैं, थोड़ा अहसास कराते तो कोई बात होती


बहू भी बेटी बन सकती है, कभी बनके दिखाते तो कोई बात होती
सभी के साथ अपना रिश्ता, दिल का बनाते तो कोई बात होती

हैसियत अपने घर की बहुओं की, बराबरी से तौल पाते तो कोई बात होती
बहुएँ तो सिर्फ काम करने के लिए होती है, ये सोच बदल पाते तो कोई बात होती

अपने हिसाब से अपनी जिंदगी जीना गलत नहीं है, ये सिखलाते तो कोई बात होती
इसे अपने लिए जायज और दूसरों के लिए नाजायज, ना ठहराते तो कोई बात होती

उकसाने के बजाये बड़ों को भी, गलती का अहसास कराते तो कोई बात होती
तुम रिश्तों में सेतु बन सकते थे, कभी बनके दिखाते तो कोई बात होती
कभी बनके दिखाते तो कोई बात होती
कभी बनके दिखाते तो कोई बात होती

कोई बात होती कविता का वीडियो - Video of Koi Baat Hoti Poem




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डिस्क्लेमर (Disclaimer)

इस कविता की समस्त रचनात्मक सामग्री रमेश शर्मा की मौलिक रचना है। कविता में व्यक्त विचार, भावनाएँ और दृष्टिकोण लेखक के स्वयं के हैं। इस रचना की किसी भी प्रकार की नकल, पुनर्प्रकाशन या व्यावसायिक उपयोग लेखक की लिखित अनुमति के बिना वर्जित है।
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