बरगद की छाँव कविता - Bargad Ki Chhanv Poem

Bargad Ki Chhanv Poem, इसमें बरगद की छाँव कविता के माध्यम से इंसान के आपसी रिश्तों को लेकर मन में उठती भावनाओं के बारे में जानकारी दी गई है।

Bargad Ki Chhanv Poem

बरगद की छाँव कविता के बोल - Lyrics of Bargad Ki Chhanv Poem


सुना है बरगद की छाँव में शीतलता मिलती है
इसकी शाखाओं पर बहुत से पंछियों की शाम ढलती है
बरगद नहीं पनपने देता दूसरे पेड़ों को अपने साए में
इसके साए में इन्हें तन्हा-तन्हा मौत मिलती है।

जब बरगद की दूसरी जड़ें जमीन को छूने लगती है
बरगद से अलग अपने वजूद को ढूँढने लगती हैं
ये जड़े बरगद के साये वाले पेड़ नहीं है
इन जड़ों से तो बरगद को मजबूती मिलती है।


जब बरगद की सारी ताकत कुछ शाखाएँ ले जाती है
जब बरगद की कुछ शाखाएँ बस देखती रह जाती है
झुकने लगता है बरगद जब सिर्फ एक ही तरफ
तब कोई भी शाख अपना वजूद बचा नहीं पाती है।

कहते हैं बरगद पर परमात्मा का वास होता है
इसके साये में रक्षित होने का आभास होता है
अस्तित्व रहता है उस बरगद का सदियों तक
जिसको अपनी जड़ों पर पूरा विश्वास होता है।

जब बरगद की जड़ों को ताकत का अहसास होता है
जब बरगद की शाखाओं में आपसी विश्वास होता है
बीत जाते हैं पतझड़ और तूफानों के मौसम यूँ ही
और सभी घोंसलों का हर एक पंछी खुशहाल होता है।

हर एक पंछी खुशहाल होता है
हर एक पंछी खुशहाल होता है।

बरगद की छाँव कविता का वीडियो - Video of Bargad Ki Chhanv Poem



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डिस्क्लेमर (Disclaimer)

इस कविता की समस्त रचनात्मक सामग्री रमेश शर्मा की मौलिक रचना है। कविता में व्यक्त विचार, भावनाएँ और दृष्टिकोण लेखक के स्वयं के हैं। इस रचना की किसी भी प्रकार की नकल, पुनर्प्रकाशन या व्यावसायिक उपयोग लेखक की लिखित अनुमति के बिना वर्जित है।
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