साइको कविता - Psycho Poem

Psycho Poem, इसमें साइको नामक कविता के माध्यम से एक लड़के या लड़की की किसी खास इंसान के संबंध के लिए मन में आने वाली भावनाओं को बताने की कोशिश की गई है।

Psycho Poem

साइको कविता के बोल - Lyrics of Psycho Poem


कहते हैं
बरसों के साथ के बाद
मन की बातें भी
समझ में आने लगती हैं
फिर कुछ कहने के लिए
जुबां की जरूरत नहीं होती

शायद ये मेरी ही भूल है
जो मैं इन बातों को
सच मान बैठा
और लगा बैठा किसी से उम्मीद
कि वो मेरे मन की बातों को
बिना कहे समझता है

जब किसी बात पर
होती है उससे नाराजगी
तब इसी उम्मीद में
करता हूँ उसका इंतजार
कि दूर कर देगा वो गिले शिकवे
देकर एक जादू की झप्पी

लेकिन उसने मेरे गुस्से को
मेरा गुरूर जान लिया
बड़ी आसानी से मुझे
इगोइस्ट मान लिया
और साथ में दे दी मुझे
साइको की उपाधि


शायद मैं साइको ही हूँ
जो उसे इस कदर
चाहता हूँ कि
उस पर गुस्सा आने पर भी
खुद को ही तकलीफ
देता रहता हूँ

शायद मैं साइको ही हूँ
जो मुझसे
उसकी बेरुखी
बर्दाश्त नहीं होती
और तड़पता रहता हूँ तब तक
जब तक वो मेरे पास नहीं आता

मैं क्या करूं
मुझे नही आता मनाना
मुझे नहीं आता
बोलकर और जताकर
किसी तरह की
फॉर्मेलिटी निभाना

मेरे लिए उसके बिना
बेमानी है
जीवन की कल्पना
शायद इसीलिए
बिना सोचे समझे
जता देता हूँ हक अपना

लेकिन बहुत तकलीफ होती है तब
जब आपका ये हक
उसकी निगाह में
आपका गुरूर बनकर
आपको इंसान से
बना देता है साइको

साइको कविता का वीडियो - Video of Psycho Poem



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डिस्क्लेमर (Disclaimer)

इस कविता की समस्त रचनात्मक सामग्री रमेश शर्मा की मौलिक रचना है। कविता में व्यक्त विचार, भावनाएँ और दृष्टिकोण लेखक के स्वयं के हैं। इस रचना की किसी भी प्रकार की नकल, पुनर्प्रकाशन या व्यावसायिक उपयोग लेखक की लिखित अनुमति के बिना वर्जित है।
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